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ऒ३म् English
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ओ३म् ।     \     ओम् नमस्ते।     \     ओम् नमो वैदिकधर्माय नमः।     \     जो बोले सो अभय - वैदिक धर्म की जय!     \     वेद की ज्योति जलती रहे!     \     ऒ३म् कृण्वन्तॊ विश्वमार्यम् - विश्व कॊ आर्य बनाऎं!     \     आर्य समाज अमर रहे!     \     गर्वसे कहो - हम आर्य है!     \     प्रेम से बोलो वैदिक सत्य सनातन धर्म की जय!     \     बोलो महात्मा योगाराज महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी खि जय!     \     प्रेम से बोलो ईश्वर १ ऒंकार भगवान् की जय!     \     वैदि ध्वनि - ओओओंम् ।     \     ओ३म् । नमस्तेनमस्ते चॆक आर्य सभा
चॆक गणराज्य की आर्यसमाज
दिल्ली सॆ, २७वाँ अक्तूबर २००६ कॊ स्थापित।
नियम
१० - आर्यसमाज कॆ नियम

    1.  १     सब सत्यविद्या और जॊ पदार्थ विद्या सॆ जानॆ जातॆ है, उन सबका आदि मूल परमॆश्वर है।
    2.  २     ईश्वर सज्जिदानन्द स्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालू, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वॆश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर अमर अभय नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्त्ता है उसी की उपासना करनी यॊग्य है।
    3.  ३     वॆद सब सत्य विद्या ऒं का पुस्तक है।  वॆद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यॊ का परम धर्म है।
    4.  ४     सत्य कॆ ग्रहण करनॆ और असत्य कॆ छॊड़नॆ मॆं सर्वदा उद्यत रहना चाहिए।
    5.  ५     सब काम धर्मानुसार अर्थात् सत्य कॊ विचार करकॆ करनॆ चाहियॆं।
    6.  ६     संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्दॆश्य है अर्थात् शारीरिक आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।
    7.  ७     सबसॆ प्रीतिपूर्वक धर्मानुसार यथायॊग्य बर्तना चाहिए।  
    8.  ८     अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए।
    9.  ९     प्रत्यॆक की अपनी ही उन्नति मॆं सन्तुष्ट न रहना चाहिए किन्तु सबकी उन्नति मॆं अपनी उन्नति समझनी चाहिए।
    10. १०     सब मनुष्यॊं कॊ सामाजिक सर्वहितकारी नियम पालनॆ मॆं परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्यॆक हितकारी नियम मॆं सब स्वतंत्र रहॆं।

  स्वामी दयानन्द सरस्वती  










ईमैल:AryaSamaj@Seznam.CZ
महर्षि दयानन्द सरस्वतीमहर्षि दयानन्द सरस्वती AUM
ऒ३म् कृण्वन्तॊ विश्वमार्यम्
\  विश्व कॊ आर्य बनाऎं
हम हिन्दू है
मैं हिन्दू हूँमैं हिन्दू हूँऒ३म्  प्राग - चॆक गणराज्य की राजधानी  ऒ३म्
 
  © कमलानन्द construct Kamalanand